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भारत-PAK संवाद पर क्या बोलीं महबूबा मुफ्ती? 115 से अधिक हस्तियों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने संयुक्त अपील की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ से शांति बहाली के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है। यह अपील दोनों देशों के बीच सामान्य द्विपक्षीय संबंधों और संवाद को फिर से शुरू करने के लिए है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखे जाने के मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पदाधिकारियों की द्विपक्षीय बातचीत के समर्थन वाली हालिया टिप्पणियों का स्वागत भी किया।

भाजपा ने पत्र लिखे जाने की आलोचना क्यों की?
इस घटनाक्रम पर जम्मू-कश्मीर के विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि बातचीत का आह्वान करना गलत है। पत्र लिखे जाने की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद कम हो रहा है, ऐसे में बातचीत का समय उचित नहीं है। शर्मा ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान से जुड़ाव के मामले केवल भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने ऐसे बयानों को निंदनीय बताया और कहा कि भविष्य की पीढ़ियां इन्हें माफ नहीं करेंगी।

भारत और पाकिस्तान की तरफ से किसने भेजा पत्र?
यह अपील सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस द्वारा जारी की गई है। इस पर 117 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें भारत से 61 और पाकिस्तान से 56 नागरिक शामिल हैं। अपील में दोनों सरकारों से लंबे समय से चली आ रही शत्रुता को समाप्त करने का आग्रह किया गया है। हस्ताक्षर करने वाले लोगों ने कहा कि यह शत्रुता लाखों युवाओं को अवसर, समृद्धि और सुरक्षित भविष्य से वंचित कर रही है। पत्र में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान मिलकर लगभग एक-पांचवें मानव समुदाय का घर हैं। दोनों देशों के लोग शांति, विकास और सहयोग से परिभाषित भविष्य के हकदार हैं।

किसने तैयार किया पत्र?

‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ के चेयरमैन ओपी शाह ने 30 जून को तैयार किया पत्र।
भारत की 61 और 55 पाकिस्तानी हस्तियों ने हस्ताक्षर किए।

पूर्ण राजनयिक संबंधों की वकालत

नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों को फिर से नियुक्त किया जाए।
सामान्य वीजा सेवाएं शुरू करने और सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय बातचीत फिर से शुरू करने का आह्वान।
2004 और 2007 के बीच तय फ्रेमवर्क पर विचार करते हुए जम्मू-कश्मीर पर चर्चा करने की मांग।
दोनों देश ‘वैध सुरक्षा चिंताओं’ को ध्यान में रखते हुए सेना की तैनाती कम करें।
तीर्थयात्रियों के लिए करतारपुर साहिब कॉरिडोर और शारदा पीठ को फिर से खोलें दोनों देश।
पत्र में शामिल अन्य अपीलों में क्या खास?

व्यापार के रास्ते फिर से खोले जाएं।
सामान्य व्यावसायिक संबंध बहाल करें दोनों देश।
‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) या उसके बराबर का व्यापार समझौता फिर से लागू करें।
अटारी-वाघा जमीनी सीमा को फिर से खोलने पर सहमति बने।
दिल्ली-लाहौर बस सेवा, श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा, समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस को फिर से शुरू किया जाए।
करगिल-स्कार्दू रूट खोलने के साथ-साथ कमर्शियल उड़ानों के लिए हवाई क्षेत्र फिर से खोलने की भी मांग।
पत्र लिखने वाले लोगों ने और किन बातों पर जोर दिया?

भारत और पाकिस्तान में दुनिया की लगभग एक-पांचवीं आबादी रहती है और यहां के लोगों का एक बड़ा हिस्सा युवा है।
सरकारों से अलग-थलग रहने के बजाय बातचीत और मेलजोल का रास्ता चुनने की अपील।
दुश्मनी के बजाय बातचीत करें और टकराव के बजाय सहयोग करें दोनों देश।

यात्रा प्रतिबंधों में ढील दी जाए।
छात्रों, पत्रकारों, कलाकारों और व्यापारियों के बीच आपसी संपर्क और आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाए।
मीडिया आउटलेट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगी पाबंदियां हटाने की भी मांग।
दक्षिण एशिया का भविष्य बंटवारे और टकराव से नहीं, बल्कि शांति, खुशहाली और साझा तरक्की से तय होना चाहिए।
यह अपील ‘किसी राजनीतिक रुख का समर्थन’ नहीं। पत्र लगभग दो अरब लोगों की भलाई और उम्मीदों को ‘टकराव और बंटवारे से ऊपर’ रखने की उम्मीद में पुकार की तरह है।
लगातार दुश्मनी की वजह से लाखों युवा मौकों, खुशहाली और सुरक्षित भविष्य से वंचित रह जाते हैं।

विश्वास बहाली के कौन से उपाय सुझाए?
हस्ताक्षर करने वाले लोगों ने पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने की मांग की है। उन्होंने नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों को फिर से नियुक्त करने का आग्रह किया है। सामान्य वीजा सेवाओं को फिर से शुरू करने और वाणिज्यिक उड़ानों के लिए हवाई क्षेत्र खोलने की भी बात कही गई है। इसके अलावा, अटारी-वाघा भूमि सीमा को व्यापार और यात्रा के लिए फिर से खोलने की मांग की गई है। श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा और अन्य सीमा पार संपर्क पहलों को पुनर्जीवित करने का भी अनुरोध किया गया है।

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले लोगों में कौन?
यह अपील करने वाले भारतीय लोगों में नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। राजद सांसद मनोज झा और पूर्व टीएमसी मंत्री व वर्तमान एजेयूपी नेता हुमायूं कबीर ने भी हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तानी हस्ताक्षरकर्ताओं में पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी प्रमुख हैं। पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी, नेशनल असेंबली सदस्य इस्फान्यार भंडारा और परमाणु भौतिक विज्ञानी परवेज हुदभोय भी शामिल हैं।

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