अदालत जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हस्तक्षेपकारी निगरानी के खिलाफ याचिका पर करेगी सुनवाई
नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जंतर-मंतर पर जारी विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित ”लगातार, मनमनी और हस्तक्षेपकारी निगरानी’ के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर 20 जुलाई को सुनवाई करेगा।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू)की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ से तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि पुलिसकर्मी विरोध-प्रदर्शन वाली जगह पर मोबाइल और कैमरे लेकर घूम रहे हैं, जिससे प्रदर्शन कर रहे छात्रों का मनोबल टूट रहा है।
घोष ने दावा किया कि पुलिस का व्यवहार प्रदर्शनकारियों के निजता के मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन है। वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा अदालत से जनहित याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किये जाने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने इसे सोमवार को सुनवाई पर सहमति जताई।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ”हम इसकी तारीख पहले कर रहे हैं (बुधवार के बजाय, जब जनहित याचिका पर सुनवाई होती है)। सोमवार को आइए।” राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा-स्रातक (नीट-यूजी) में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) गत 26 दिन से ज्यादा समय से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही है।
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून को आंदोलन में शामिल हुए और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
अधिवक्ता सुभाष चंद्रन के.आर. के जरिए दाखिल की गई जनहित याचिका में दावा किया गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बड़े पैमाने पर ”नियमित और हस्तपक्षेपकारी निगरानी” संवैधानिक रूप से गलत और जरूरत से ज्Þयादा है, और इसे सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने या राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सही नहीं ठहराया जा सकता।
इसमें अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर की जा रही फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और निगरानी को तत्काल तब तक के लिए रोक दें, जब तक कि ”सार्वजनिक व्यवस्था के लिए कोई तत्काल, वास्तविक और आसन्न खतरा” न हो जो ऐसे उपायों को सही ठहराता हो।


