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ऑपरेशन सिंदूर के बाद, ‘मेड-इन-इंडिया’ रक्षा उपकरणों पर भरोसा बढ़ा: राजनाथ

नयी दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ‘मेड-इन-इंडिया’ रक्षा उपकरणों पर भरोसा बढ़ा है। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि “आज हमारा रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये से ज्Þयादा हो गया है, जबकि लगभग 8-9 साल पहले यह करीब 46,000 करोड़ रुपये था”। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आॅपरेशन ंिसदूर के बाद “मेड-इन-इंडिया रक्षा उपकरणों पर भरोसा बढ़ा है”।

ऑपरेशन सिंदूर, पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में मई 2025 में भारत द्वारा की गई एक निर्णायक सैन्य कार्रवाई थी। भारत में बनी कई रक्षा प्रणालियों ने इसमें अहम भूमिका निभाई थी। राजनाथ सिंह ने कहा, “रक्षा निर्यात भी रिकॉर्ड 38,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। यह 2013-14 में सिर्फ 686 करोड़ रुपये था और आज यह 57 गुना बढ़ गया है।

मैंने पूरी रिपोर्ट तो नहीं मांगी है, लेकिन मेरा अंदाजा है कि अभी यह आंकड़ा 40,000 करोड़ रुपये के आसपास होगा।” उन्होंने अपने संबोधन में पिछले 12 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में भारत की यात्रा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की प्रगति और एआई के दौर में मानवीय संवेदनशीलता के महत्व (जिसमें पत्रकारिता का क्षेत्र भी शामिल है) पर भी बात की।

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय ंिहदी दैनिक ‘नवभारत टाइम्स’ के 80 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दिल्ली में आयोजित किया गया था। राजनाथ सिंह ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में भारत की यात्रा अभावों से आत्मनिर्भरता की ओर, आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास की ओर और आत्मविश्वास से विकसित भारत के निर्माण की ओर रही है।” उन्होंने कहा कि भारत तकनीकी विकास और अपनी परंपराओं को मनाने, दोनों पर जोर देता है और “परंपरा एवं तकनीक” का यह संगम “21वीं सदी में देश की सबसे बड़ी ताकत” है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के आज मानव जीवन के लगभग हर पहलू को प्रभावित करने का उल्लेख करते हुए उन्होंने आगाह किया कि एआई आंकड़ों को पढ़ और उनका विश्लेषण तो कर सकती है, लेकिन वह लोगों की नब्ज नहीं पहचान सकती। उन्होंने कहा कि यहीं पर मानवीय संवेदनशीलता और मानवीय समझ की अहम भूमिका सामने आती है।

राजनाथ सिंह ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी तकनीकी प्रगति से ‘पत्रकारिता’ भी प्रभावित हुई है लेकिन ये मानवीय रचनात्मकता और बुद्धि को पीछे नहीं छोड़ पाएंगी। उन्होंने कहा, “पत्रकारिता की भावी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह एआई की क्षमताओं और मानवीय सहानुभूति के बीच कितना अच्छा संतुलन और तालमेल स्थापित कर पाती है। जहां एआई पत्रकारिता को तेज और अधिक सटीक बनाएगा, वहीं भावनात्मक बुद्धिमत्ता यह सुनिश्चित करेगी कि यह मानवीय और विश्वसनीय बनी रहे।”

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